प्रधानमंत्री के खिलाफ बहुत बड़ी साज़िश हुई विफल। आखिर किसने रची थी ये चाल?

पिछले कई दिनों से अरविन्द केजरीवाल और उनके गुर्गे नरेंद्र मोदी को फ़साने की कोशिश कर रहे थे। जूठे बनावटी दस्तावेज़ दिखा कर वो बिरला और सहारा कंपनियों से मोदीजी ने पैसे लिए ये साबित करने की कोशिशो में लगे थे। सुप्रीम कोर्ट ने इन् सारे दस्तावेज़ों को बनाया हुआ और झूठ बोलते हुए इसपे आगे बात करने से भी मना कर दिया।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा के अगर इसपे आगे सुनवाई करनी है तो इलज़ाम लगाने वालो को इससे बेहतर सबूत लाने होंगे। ये कहते हुए उन्होंने अगली सुनवाई की तारिख 14 दिसम्बर की रख दी ताकि बेहतर सबूत लाने का वक़्त मिल सके।

“आप ये वापस लो। और तब आना जब आपके पास बेहतर सबूत हो। अभी तो ये बस दोषारोपण है,” सुप्रीम कोर्ट ने कहा (अनुवाद)

सुप्रीम कोर्ट ने केस दर्ज करने वाले NGO को कहा के इस वक़्त देखा जाये तो ये केस बुरी भावना से दायर किया हुआ केस है। और ये हवा में पतंग उड़ाने जैसा है। कोर्ट ने हिदायत दी के अगर बेहतर सबूत हो तो उन्हें पेश किया जाए।

प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ हो रही साज़िशो में से ये एक और हिस्सा था।
आपको याद होगा के अरविन्द केजरीवाल ने कुछ कागज़ दिखाते हुए कहा था के ये मोदी जी के घुस लेने का सबूत है।

कोर्ट ने साफ़ साफ़ कहा के ऐसे तो कोई भी कंप्यूटर पे सादे पेज पे कुछ भी एंट्री कर देगा। तो क्या हम उसे सबूत मानकर पूरी दुनिया को उसमे घसीटने लगेंगे। अगर सबूत पक्का नहीं हो तो उसपे करवाई कैसे की जाये। हम कार्रवाई करने से मना नहीं कर रहे, लेकिन उस तरह के सबूत भी सामने रखने की ज़रूरत है।

केजरीवाल और उनके गुर्गो ने पहले भी ऐसे कई केस लगाए है मोदीजी और उनके मंत्रियो पे और ऐसे कई केस कोर्ट ने खारिज किये हुए है। कीचड उछाल कर अच्छा काम कर रहे इंसान का नाम ख़राब करना, अगर ये अच्छी राजनीती कही जाएगी तो शायद हमे एक देश के रूप में इसपे विचार करने की आवश्यकता है।

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