भारत में ‘बुलेट-प्रूफ ट्रेन’

यह तब हुआ जब में अपने कॉलेज हॉस्टल से घर वापस आ रहा था. मैंने इस यात्रा के लिए भारतीय रेल से आना उचित समझ.

रेल के जिस डब्बे में मई था, वह मेरी ही सीट के बाजु में एक अधेर उम्र के दो आदमी बैठे थे और एक उन्ही के उम्र के उनके दोस्त उनके सामने बैठे थे. जैसा की हम सब जानते है, जब से श्री नरेंद्र मोदी जी हमारे देश के प्रधान मंत्री बने है तब से हर जगह लोग बस पॉलिटिक्स की ही बाते करने लगे है. कुछ ऐसा ही माहौल वह भी बना था और वे लोग अपने राज्य की और भारत सर्कार की पोलिटिकल फैसलो की चर्चा करने लगे.

असल में वे लोग तथ्यों के आधार पर नै बल्कि कुछ अफवाहों के आधार पर अपनी चर्चा को बढ़ा रहे थे. ऐसे कई मौके आये जहा उन्होंने व्हाट्सएप्प पर फॉरवर्ड किये हुए मेस्सगेस को आधार बनाकर अपना पक्ष रखा था.

कुछ समय तक अपने राज्य सरकारों के काम काज के तरीको के बाद उन्होंने अपना ध्यान केंद्र सर्कार के फैसलो के और मोड़ दिया.

कुछ देर तक श्री नरेंद्र मोदी जी के विदेश यात्रा, तो कभी भारत की बढ़ती महंगाई दर और कभी किसी और विषय पर बात करने लगे. तभी उन्होंने कुछ ऐसी बात की जो सुनकर मई एक पल के लिए तो अपने होश खो बैठा था. आज भी मैं स्वयं को भाग्यशाली समझता हु की मुझे उस दिन वह सीट मिली और आज मैं आप सब से अपना यह अनुभव शेयर कर पा रहा हु.

उन में से एक व्यक्ति ने कहा – “भारत में यह ‘बुलेट-प्रूफ ट्रेन’ लाने की आखिर जरुरत ही क्या है?”

Bullet Proof Train

आखिर मोदी जी बार बार जापान जा जा कर ‘बुलेट-प्रूफ ट्रेन्स’ का समझौता कर ही क्यों रहे है?”

ऐसी बाते सुनकर मुझे न केवल उलझन मची, बल्कि मई यह भी सोचने लगा था की आखिर लोग बिना तथ्यों और बेतुके आधारों के दम पर न जाने क्या क्या अफवाह फैला रहे है.

अगर वे लोग बेतुके तथ्यों के आधार पर ऐसी बाते न कर रहे होते, तो शायद मैं भी उनके साथ अपने विचार शेयर करता था. मई स्वयं भी भारतीय पॉलिटिक्स को फॉलो कर रहा हु और ऐसे मैं ऐसी बातो से मुझे चिढ मचने लगती है जिनका की कोई आधार ही न हो.

मैं  यह भी नहीं कह रहा हु की तर्क के आधार पर बात करना मतलब की सिर्फ एक लीडर का पक्ष लेना होता है, बल्कि हम तर्क के आधार पर ही किसी बी नेता अथवा लीडर के विरोध मैं भी रहे सकते है. बिना किसी तर्क, बिना किसी आधार के, बिना पूर्ण ज्ञान के, बातो को फैला कर के लोग भारत वर्ष मैं और भारत वर्ष की प्रगत्ति व उन्नति को ही ठेस पंहुचा रहे है.

 

“अधजल गगरी छलकत जाए ” – यानी “अधूरा ज्ञान काफी खतरनाक होता है.”

 

सोर्स – Quora.

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