मोदी जी का एक और बड़ा फैसला: 20000 NGO का लाइसेंस रद्द; अब सिर्फ 13000 NGO को क़ानूनी मान्यता।

मोदी सरकार ने आज बहुत बड़ा फैसला लेते हुए करीब 33000 नगो में से 20000 NGO के लाइसेंस रद्द कर दिए है। इस बड़े फैसले के बाद अब सिर्फ 13000 NGO बचे है जिनके पास पूरी कानूनी मान्यता है। सूत्रों के अनुसार जिन NGO का लाइसेंस कैंसिल किया गया है उन सबने किसी न किसी कानून का उलंघन किया है।

इस से पहले 15 दिसम्बर को 7 NGO, जिनमे से एक शबनम हाश्मी का है, की FCRA लाइसेंस को रद्द कर दिया गया था। इनके पीछे इंटेलिजेंस विभाग से मिले खबरों का हवाला दिया गया था। सूत्रों के अनुसार इंटेलिजेंस विभाग ने इनके बुरे गतिविधियों में लिप्त होने की रिपोर्ट दी थी।

इसके अलावा 14 दिसम्बर को सरकार ने ग्रीनपीस इंडिया और तीस्ता सेतलवाद द्वारा चलाये जाने वाले 2 NGO के FCRA लाइसेंस कैंसिल कर दिए थे।

आपको बता दे के FCRA लाइसेंस विदेशों से पैसे लेने के लिए बहुत ज़रूरी है। इसके बिना विदेशों से आप अपने NGO के लिए पैसे नहीं मँगा सकते। इन सभी नगो ने एक के बाद एक कई देशविरोधी गतिविधियों में हिस्सा लिया है। इनमे से कुछ ने देश की सरकार को दलित विरोधी साबित करने के लिए विदेशों में प्रचार किया है, तो कई दूसरो ने देश के प्रधानमंत्री के ऊपर कीचड उछालने में कोई कसर नहीं छोड़ी।

तीस्ता सीतलवाद, जिनके 2 NGO का लाइसेंस कैंसिल किया गया है, उनपर ये भी आरोप है के उन्होंने NGO के लिए जो पैसा इखट्टा किया था, उसे अपने शौक मौज पे खर्च किया। इसमें दारू के लिए और अपने ऊपर और फ़िज़ूल के खर्चे के लिए भी पैसे शामिल थे।

इसके अलावा 300 NGO को प्रायर परमिशन वाली केटेगरी में भी रखा गया है। इसका मतलब ये हुआ के अब अगर उन्हें विदेशों से पैसे मंगाने हुए तो उन्हें पहले सरकार से पहले इजाज़त लेनी होगी।

तो अब आपको ये बताये के आखिर ये इतना बड़ा कदम क्यों है। 

एक रिपोर्ट के अनुसार 2014 में भारत के NGO में विदेशों से 11500 करोड़ आये थे। याने के सिर्फ 1 साल में ही भारत में 11500 करोड़ NGO के पास आये थे। इन पैसो का क्या मकसद है इसपे बाद में आएंगे, पहले आपको ये बता दे के इतना पैसा आने के बाद भी सिर्फ 2% NGO अपना इनकम टैक्स भरते है।

अब आपको बताते है के इन पैसे का इस्तेमाल कहाँ होता है। बहुत सारे NGO अच्छे कामो के लिए इन पैसो का इस्तेमाल करते है।

लेकिन बहुत सारे NGO इन पैसों का इस्तेमाल:

1) भारत की प्रगति को रोकने के लिए करते है।

जैसे के नुक्लेअर पावर प्लांट बनाने की बात हुई तो वहाँ के लोगों को भड़का के पावर प्लांट बनने से रुकवाना। या फिर नर्मदा बांध के खिलाफ चलने वाला प्रदर्शन। ऐसे कई प्रदर्शन करने के लिए इन पैसों का इस्तेमाल होता है।

2) जात और धर्म के नाम पे तनाव फैलाना।

उदाहरण के तौर पर 2002 के दंगों के बाद हिलेरी क्लिंटन ने गुजरात में कई जगहों पर खुदवाई करवाई थी ताकि ये साबित कर दे के मोदी ने बड़े स्तर पर कत्लेआम करवाया है मुसलमानो का। लेकिन ऐसा कुछ न मिला था। इसके अलावा छोटी सी भी घटना को बढ़ा चढ़ा के दिखाके दलितों को बाकी हिंदुओं से लड़ाने की कोशिशें भी करवाते है ऐसे NGO।

3) देश में उत्पात मचाना।

यमन, सीरिया, इराक और ऐसे दुसरे देशों में उत्पात मचने में विदेशों से आये पैसे का बहुत बड़ा हाथ था। और इनको इन्ही NGO के द्वारा उन देशो में भेज जाता है, जिनके अंदर तबाही मचानी हो।

4) धर्मान्तरण करना।

कई क्रिस्चियन NGO भारत में लोगों का धर्मातरण करने के लिए विदेशो से हज़ारो करोड़ की राशि पाते है। और उसका इस्तेमाल करके वो भारत में गरीबो और पिछडो का धर्मान्तरण करवाने की कोशिश करते है।

इन सब को मद्देनज़र रखते हुए ऐसे NGO और उनके पास आने वाले विदेशी पैसे पर नज़र बनाये रखना बहुत ज़रूरी है।

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