मुस्लिम उम्माह में दरार? सऊदी मर्द अब नहीं कर सकेंगे पाकिस्तानी महिलाओ से निकाह। इज़ाज़त लेनी होगी।

पाकिस्तान के नेता बार बार अपने लोगों को खुश करने के लिए मुस्लिम उमाह, याने के पूरे दुनिया के सारे मुस्लिम एक बराबर, की बाते करता रहता है। मुस्लिम उम्माह का मतलब होता है मुस्लिम दुनिया। ऐसा होने के लिए सभी मुस्लिम एक बराबर होना पहली शर्त होगी। इसका मतलब हुआ के देश, राज्य, रंग और पैसा मायने नहीं रखेगा, सिर्फ मुस्लमान होना मायने रखेगा।

लेकिन हकीकत तो फिर हकीकत है।

सऊदी अरब के सरकार ने नया फरमान लाते हुए सऊदी के मर्दों को कहा है के वो पाकिस्तान और 3 अन्य मुल्कों की मुस्लिम लड़कियों से निकाह न करे। ये तीन देश है बांग्लादेश, चाड और म्यांमार। सूत्रों से मिले आंकड़ों के अनुसार इन चार देशो से कुल 500000 महिलाये सऊदी अरब में रहती है।

अगर कोई सऊदी मर्द इन देशो की लड़कियों से निकाह करना चाहेगा तो उसे सरकार से इसके लिए इजाज़त लेनी पड़ेगी।

सरकार कई नियमो को ध्यान में रख कर या तो निकाह की अनुमति देगी या मन कर देगी। सबसे पहले तो जो सऊदी मर्द निकाह के लिए एप्लीकेशन डालेगा, उसकी उम्र कम से कम 25 साल होनी होगी। उसके अलावा उसके अपने ज़िले के मेयर से प्रमाणपत्रों पर दस्तखत भी करवाने होंगे। अगर वो पहले से ही शादीशुदा है तो उसे सबूत देना होगा के उसकी बीवी या तो शारीरिक रूप से विकलांग है या फिर किसी घातक बीमारी से जूझ रही है, या बच्चा नहीं पैदा कर सकती।

तलाकशुदा आदमियों को तलाक के छे महीने के अंदर अप्लाई नहीं करने दिया जायेगा।

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